शुक्रवार, अगस्त 06, 2010

" प्यार "

'प्यार' एक शब्द नहीं है...
और ना ही है -
ध्वनि मात्र .....

प्यार तो एक
अनुभूति है ...
भावनाओ का मंजर है ...
धडकनों का स्पंदन है ....

'प्यार'
तुम्हारी स्वभावानाओ का
उद्दगार है ...
तुम्हारी सुदेह की प्रतिकृति है,
और
अभिव्यक्ति है तुम्हारे
ह्रदय भावो की ....

'प्यार'
सिर्फ पोषक नहीं रिश्तो का
यह प्रस्फुटन है संभावनाओ का ....

2 टिप्‍पणियां:

Asha Joglekar ने कहा…

प्यार'
सिर्फ पोषक नहीं रिश्तो का
यह प्रस्फुटन है संभावनाओ का ....
वाह क्या बात कही है ।

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

बहुत सुन्दर ....