रविवार, नवंबर 07, 2010

सिखाया था माँ ने........

हँसोगे तो संग- संग ये दुनिया हँसेगी,
रोने पे सब कह देंगे बेगाना ,
सिखाया था माँ ने ये गुर बहुत पहले ,
हमीं न-समझ थे ,बढ़ी देर से माना !!!

मुहब्बत हो किसी से कितनी भी गहरी ,
आखिर इंसां है ..फ़रिश्ता नहीं है ,
ज़रा सी भी उलझन न हो जिसमे ,
ऐसा दुनिया में कोई रिशता नहीं है ,

दिल में हो उदासी भले जितनी भी छाई ,
हर हाल में हल पल तू बस मुस्कुराना ,
सिखाया था माँ ने ये गुर बहुत पहले ,
हमीं न-समझ थे ,बढ़ी देर से माना !!!

सच हो जो कहना ....,ज़रा सोच लेना ,
झूठ के लिए कोई तोल नहीं है,
लेन-देन का खेल है सब यहाँ ,
अहसासों को कोई मोल नहीं है ,

अपना है मगर..हरजाई बड़ा है ,
इस कमबख्त दिल की न बातों में आना ,
सिखाया था माँ ने ये गुर बहुत पहले ,
हमीं न-समझ थे ,बढ़ी देर से माना !!!