अपनी इस छोटी सी जिन्दगी में
झेले है कितने दुःख .....
ये में ही जानती हूँ
पर कितने जरुरी थे ये दुःख
ये भी मानती हूँ....
क्योकि –
दुःख ही आदमी को
दुःख से लड़ना सिखाते है,
मंजिल अपने मुकाम की
खुद गढ़ना सिखाते है ..
सिखाते हैं –
है वो ही
असल में जिन्दगी का राजदा
जो दुःख को अपने में समेटेगा …
इसलिए –
मैंने किया है ये अनुभव
सुख की शैया पर
जिन्दगी बहक जाती है
दुःख की दहलीज पर
जिन्दगी चहक जाती है ...
दुःख वो खुशनुमा खवब है
जिसके दामन में जिन्दगी
फूलो सी महक जाती है …
शुक्रवार, अक्टूबर 29, 2010
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3 टिप्पणियां:
दुखों के बारे में इतना कुछ और फिर उसमें खुश हो जाना सुन्दर रचना
"दुःख ही आदमी को
दुःख से लड़ना सिखाते है,
मंजिल अपने मुकाम की
खुद गढ़ना सिखाते है .."
बहुत खूब
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