वो सुबह नयी थी और शायद सबसे अलग भी,
क्योंकि -
उस सुबह का सूर्योदय नव उदय था मेरे जीवन में
तुम्हारे रूप में ...
एक खुबसूरत संभावना...
की जैसे - किसी चित्रकार ने कोई अक्स बनाया हो
की जैसे - किसी शिल्पी ने गढी हो कोई मूरत अपने मन मंदिर में
की जैसे - किसी कवि ने कोई नया शब्द पिरोया हो अपनी कविता में
की जैसे - किसी कोई मीठा सुर निकला हो किसी साज से ....॥
तुम्हारी उड़ान को अब और विस्तार मिलेगा ,
तुम्हारे खाव्बो के हंस उड़ेंगे और ऊँचे....
क्योंकि -
मैं अपने हिस्से का आकाश भी तुम्हे सौप रही हूँ ॥
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